भारत वर्ष की कुंडली में षडाष्टक योग

वर्तमान मे भारत वर्ष में एक विचित्र बात देखने को मिल रही है,जिसे देखो वही अपने को परास्त करने के चक्कर में घूम रहा है,न्याय और कानून व्यवस्था का किसी को भी ध्यान नही है जिसे देखो वह अपने अपने अनुसार पता नही क्या क्या बोलता जा रहा है,जो भी बोल रहा है वह अपने अनुसार शायद सही बोलने की बात हो लेकिन कुछ समय बाद वह अपनी ही कही बात को बदल भी दे रहा है। व्यापारी व्यापारिक स्थान को द्रिष्टि में रखकर कुछ भी कह रहा है,नौकरी वाला पता नही क्यों अपने नौकरी करने वाले स्थान के लिये ही अनाप सनाप बोले जा रहा है,गरीब गरीब को ही काटने का कार्य कर रहा है,अमीर को अमीर ही काटने का कार्य करने के लिये आगे बढा जा रहा है,राजनीतिक राजनीति को ही काटने के लिये अपनी चाल चले जा रहा है,सत्ता में जमी पार्टी अपने को काटे जा रही है,विपक्षी पार्टी भी अपने अपने अनुसार अपने को ही बदनाम करने के लिये नये नये रास्ते अपनाये जा रही है,किसान किसान को काटे डासल रहा है,मीडिया मीडिया के पीछे पडा हुआ है,इन सब का कारण भारत वर्ष की कुण्डली में चल रहा ग्रहों का षडाष्टक योग माना जायेगा।
षडाष्टक योग का मतलब होता है जन्म के ग्रह को गोचर का ग्रह आठवें भाव से देखे और जन्म का ग्रह गोचर के ग्रह को छठे भाव से देखे,इस योग का मूल कारण बनता है उसके द्वारा अपनी ही औकात को अपमान की नजर से देखना और अपने को ही दुश्मनी की नजर से देखने लग जाना,अपने द्वारा ही पहले धन कमाने के लिये रिस्क वाले कारण पैदा करना और अपने ही द्वारा उस धन के प्रति खोजबीन करने लग जाना,अपने ही द्वारा पहले गल्ती करना और बाद में अपने ही द्वारा उस गल्ती के लिये अपमानित होना,जब भी किसी से कर्जा लिया जाये तो उस कर्जे को निगलने का प्रयास किया जाये,जो कर्जा देकर सहायता करने की बात करे उसे ही कर्जा लेने के बाद खत्म करने का मानस बना लिया जाये या कर्जा देने वाले को अपमानित करने के भाव से कोई गूढ युक्ति को सोच लिया जाये,अपने ही द्वारा नौकरी दी जाये और अपने ही द्वारा लांछन लगाकर बाहर कर दिया जाये,नौकरी करने वाला मालिक के लिये जानलेवा बन जाये,राजनीति में रहने वाला व्यक्ति पहले तो अन्दरूनी रूप से कोई मुसीबत वाला कार्य करने के लिये रिस्वत ले और बाद में काम बन जाने पर रिस्वत देने वाला उस राजनीति वाले व्यक्ति की धज्जियां उडा दे,पहले तो राजनीति करने वाला व्यक्ति किसी भी काम को करने के लिये जनता के सामने आये और बाद में जब जनता उसे चुन कर अपने भले के लिये भेज दे तो वह जनता के लिये ही मुशीबत बनकर सामने आये। जनता उसे चुने कि वह शासन में जाकर उसकी रोटी को सस्ता करेगा,लेकिन वह शासन में जाकर जनता की सब्जी भी बन्द करवा दे,मीडिया अपने को जनता के सामने जनता की मुशीबतों के लिये अपने कार्यों को करने के लिये शुरु हो लेकिन शुरु होने के बाद वह जनता में ही घुस कर जनता का ही नुकसान करने लगे। वह पहले तो रिक्सा चलाने वाले काम को बन्द करने का दावा करे,बाद में उसी रिक्सा वाले को भूख से मर जाने के बाद उसी की फ़ोटो छापकर प्रशासन को जिम्मेदार बना दे,पहले तो वह रिक्सा की दौड करवाये और बाद में रिक्सा दौड में एम बी ए करने वाले छात्र की फ़ोटो रिक्सा चलाते हुये दिखाये,व्यापारी पहले तो माल को जनता में वितरण के लिये मंगाये बाद में खुद के पास जमाकर जनता को दर्शाये कि माल है ही नही,और जब पकडा जाये तो बजाय जनता से लाभ लेने के राजनीतिक व्यक्ति की शरण में जाये और लाभ की बात को हानि में बदल दे, आदि बाते षडाष्टक योग के रूप में देखी जाती है।
भारत को आजादी पन्द्रह अगस्त उन्नीस सौ सैंतालीस में मिली थी,यह आजादी मंगल केतु और राहु गुरु के षडाष्टक योग में मिली थी,यानी गुरु से राहु अष्टम में था,और केतु से मंगल षडाष्टक में था। जातियों के अनुसार राहु को मुस्लिम जाति और गुरु को हिन्दू जाति के रूप में देखा जाता है,केतु को सर्वधर्मी और सिख जाति और उन जातियों के प्रति जो अपने धर्म ग्रंथों को ही सर्वोपरि मानते है के रूप में तथा मंगल राजपूत और रक्षा करने वाली जातियों के रूप में देखा जाता है। हिन्दू को मुसलमान षडाष्टक योग से देख रहा है,तो केतु वाली जातियां मंगल वाली जातियों को षडाष्टक योग से देख रहे है। इस मंगल और केतु के बीच में जो पिसने वाली जातियां चन्द्रमा से खेती और यात्रा आदि के काम करने वाले लोग,बुध से व्यापार और संचार करने वाले लोग मीडिया आदि,शनि से गरीब और मेहनत करने वाले लोग जमीन जायदाद और प्रापर्टी आदि के लिये कार्य करने वाले लोग खनिज आदि के लिये कार्य करने वाले लोग,शुक्र से भवन निर्माण करने वाले लोग कला और संस्कृति का कार्य करने वाले लोग नाटक और फ़िल्म आदि का कार्य करने वाले लोग सूर्य से राजनीति और प्रशासनिक लोग है। गुरु से धर्म और मर्यादा पर चलने वाले लोग पूजा पाठ और ध्यान समाधि करने वाले लोग माने जाते है।
वर्तमान में भारत की स्वतंत्रता के समय का राहु अपने आपको ही षडाष्टक योग से देख रहा है,यानी मुस्लिम और इसी प्रकार की जातियां अपने को ही बरबाद करने पर तुले है,सूर्य जो भारत की स्वतंत्रता के समय सूर्य से छठे भाव में है और चन्द्र जनता को बुध व्यापारी को मीडिया को संचार के साधनो को जमीन जायदाद का कार्य करने वाले लोगों को सिनेमा नाटक और कम्पयूटर आदि के विजुअल रूप मे धता बताने के लिये सामने है,लेकिन जो भी हो रहा है वह गुप्त रूप से हो रहा है,गोचर के ग्रह भारत की कुंडली से जो अन्दरूनी तरीके से अपना प्रभाव उपरोक्त कारकों के लिये पैदा कर रहे उनके अन्दर वक्री बुध (जो लोग व्यापारिक कार्यों को छोड कर कमन्यूकेशन के कार्यों को त्याग कर,धन से धन को कमाने के कारणों को छोड्कर अथवा गुप्त रूप से गलत कार्यों को लेकर चलने वाले है वे ही वक्री बुध के अन्दर आते है) राहु भी गुप्त रूप से अपनी अक्समात हमले वाली प्रणाली के द्वारा भारत के उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र को ग्रहण लगाने के लिये तैयार खडा है,मंगल भी राहु का साथ देकर अपने कारकों से चन्द्र बुध सूर्य शनि और शुक्र को कन्ट्रोल करने के लिये सामना कर रहा है,और मारक द्रिष्टि से देख रहा है। आगे आने वाली नौ जनवरी से यह मंगल सरकारी भवनों में सरकारी कार्य करने वाले लोगों में सरकारी वाहनों में सरकारी क्षेत्र की सम्पत्तियों में देश की उत्तरी-पश्चिमी सीमा में आमने सामने की लडाई के लिये सामने आयेगा,केतु जो भारतवर्ष की स्वतंत्रता के समय भारत के दक्षिण दिशा से सम्बन्ध रखता था,और वर्तमान में सर्वोच्च पद पर आसीन है,को मोक्ष देने के लिये अपना कार्य करेगा,यह तारीख भी सात जनवरी के आसपास की मानी जा सकती है,फ़िर नये व्यक्ति का चुनाव और उसकी सर्गर्मिया मीडिया के लिये बखान करने के लिये मिल सकती है,केतु शुक्र की युति भी है इसलिये यह योग किसी बुजुर्ग महिला के लिये भी माना जा सकता है। पन्द्रह जनवरी के आसपास दे सूर्य भी अपना षडाष्टक योग की सीमा को त्याग कर जनता के सामने आने के लिये बेवश होगा,इस साल की छब्बिस जनवरी भी कुछ अच्छी समझ मे नही आ रही है,राहु से अष्टम में बुध के होने के कारण कानूनी शिकंजा या युद्ध जैसे हालात भी समझ में आ रहे है। आने वाली बाइस सितम्बर सन दो हजार ग्यारह के आसपास से ही सूर्य के साथ चलने वाला राहु का समय समाप्त होने जा रहा है,तब तक देश की राजनीति को ग्रहण लगा ही रहेगा।

2 comments:

Bhadauria said...

तुम्हारा मूल्यांकन एकदम सही है.

रामेन्द्र सिंह भदौरिया said...

लोगों के लिये प्रार्थना करना ही सही है कि जो भी हो रहा है उससे कम से कम जन हानि हो.