गुरु का राशि परिवर्तन (वृष)

आपको पहली राशि मेष का फ़ल समझ में आया होगा। इसके बाद गुरु का राशि परिवर्तन का असर जो वृष राशि पर होगा उसके लिये पहले इस राशि के स्वभाव को समझना जरूरी है। वृष राशि कालचक्र की धन और कुटुम्ब की राशि है,इस राशि के द्वारा संसार की धन वाली स्थिति एक दूसरे के प्रति रहन सहन खान पान वाली स्थिति के लिये विवेचना की जाती है। जो व्यक्ति इस वृष लगन मे पैदा होता है उसके लिये संसार में केवल भोजन अपने खुद के कुटुम्ब और सम्बन्धियों धन और बदलाव का ही असर देखने को मिलता है,इस राशि वाले जीभ के चटोरे भी कहे जाते है,वे अपने चेहरे से अधिक अपने पैरों को संभालने की कोशिश करते है,अपने को सजा संवार कर बुढापे में भी जवान रखने की कोशिश करते है,उनके अन्दर अहम भाव अधिक होता है,और इस अहम के कारण ही उनके परिवार आसपास के लोग वे उनके खुद के पुत्र पुत्री भी हो सकते है,से नही बन पाती है। इस राशि का सीधा प्रभाव अपमान मौत जानजोखिम और जासूसी वाले कामों से माना जाता है और पूरी जिन्दगी दूसरों के बारे में ही अपने भाव को प्रदर्शन करने में चली जाती है। इनका जीवन साथी से सम्बन्ध केवल कामेक्षा के पूर्ण होने तक ही रहता है। जैसे ही इनकी कामेक्षा पूर्ण हो जाती है इनका रुझान जीवन साथी से दूर होने लगता है,और अक्सर जब परिवार या किसी घरेलू बात की चर्चा की जाती है तो बातों में रूखापन आजाता है। भोजन के बनाने और खिलाने में इनकी शौक कुछ अलग ही होती है,जब भी इनको कोई वनस्पति वाली नयी चीज बनाने को मिलती है तो वे अपने रुचि से पकाने और खिलाने में विश्वास रखते है। अक्सर महिला जातकों में यह बात देखने को मिलती है। धन के मामले में इन्हे चिन्ता नही रहती है कि उधार हो गया है उसे चुकाना भी है,जब भी कोई मांगने वाला आता है तो अपने प्रभाव को अपने जीवन साथी या जिम्मेदार व्यक्ति पर डाल देते है,और आक्षेप भी इस तरह के लगा दिये जाते है कि जिसके प्रति प्रभाव डाला गया है वह तिलमिला भी जाये और उसे देना भी पडे। यह कुछ इस राशि के स्वभाव के बारे में बताया था। अब गुरु इस राशि के लिये क्या प्रभाव देता है उसके बारे में जान लीजिये।

गुरु वृष के लिये अष्टम और लाभ भाव के लिये अपन फ़ल प्रदान करता है। अष्टम मे धनु राशि और लाभ भाव मे मीन राशि के होने से जो भी लाभ वाली बातें होती है वे सभी अपमान मौत जान जोखिम और जासूसी पराशक्तियों के प्रभाव से और मृत्यु के बाद मिलने वाले धन से ही जोड कर देखी जाती है। जो भी लाभ होता है वह बिना किसी कारण के और अचानक दिमाग में आने से यात्रा बाहरी धार्मिक स्थानों में जाने से जीवन साथी के परिवार में अपने को ऊंचा साबित करने के लिये ही खर्च किया जाता है,किसी भी कारण को समझने के लिये दिमाग से बात नही की जाती है जो भी बात की जाती है वह सिर फ़ोडने जैसी बात की जाती है। जो भी लाभ के साधन होते है वे सभी इन्सानी कारणों में खर्च कर दिये जाते है। बडे संस्थानों और मानव समुदाय के प्रति इनके खर्चे देखने को मिलते है। पिछले समय में गुरु इनके दसवें भाव में गोचर कर रहा था,और गुरु के नीच होने के कारण इनका प्रभाव केवल घर मकान पानी वाले साधन बाहर आने जाने बाहर रहने के खर्चे धन को जमा करने और धन को कमन्यूकेशन आदि के साधनों पर खर्च करने घर के अन्दर के कामों और कर्जा आदि को चुकाने बीमारी आदि को ठीक करने जो भी कोर्ट कचहरी के काम या जो भी जमा धन होता है उसे खर्च करने रोजाना के कामों के अन्दर नुक्ताचीनी करने और नौकरी आदि के प्रति खोजबीन वाले काम ही माने जा सकते थे,लेकिन लाभ के मालिक का लाभ के ही भाव में प्रवेश होने के कारण यह गुरु बडे भाई के प्रति खर्चा करने और बडे भाई और मामा खानदान की आपसी तालमेल वाली स्थिति को समझने उनके ऊपर आने वाले किसी प्रकार के कष्ट को दूर करने के लिये माना जायेगा। गुरु का प्रभाव सीधा अपने बडे पुत्र के साथ रहने से भी उसकी जीवन साथी के प्रति किसी भी प्रकार की दिक्कत को समाप्त करने के प्रति भी माना जायेगा। इस गुरु का सीधा प्रभाव लगन पर जाने से शरीर के प्रति खर्चा किया जाना भी माना जा सकता है,अपने नाम को प्रदर्शित करने के लिये भी ऊंची आवाज में बोलना आदि माना जा सकता है.माता के छोटे भाई या छोटी बहिन के जीवन साथी से लगाव वाली बात भी मानी जा सकती है,यह लगाव उनकी कर्जा दुश्मनी बीमारी को निकालने के लिये भी माना जा सकता है,उनको किसी प्रकार के जोखिम से बचाने के लिये भी माना जा सकता है उनके अपमान या किसी प्रकार के मौत वाले मामले से भी माना जा सकता है। यह गुरु पुत्र सन्तान के प्रति अपनी राय देने और अपने को पुत्र के प्रति रोजाना के कार्यों पुत्र के द्वारा प्रकृति के अनुसार किये जाने वाले सेवा कार्यों के लिये भी माना जाता है,वर्तमान में शनि की स्थिति भी इस राशि के पंचम पर होने से गुरु का सीधा प्रभाव पुत्र की मानसिक या शारीरिक बीमारी से सुलझने से माना जा सकता है। पुत्र पर आने वाली आफ़तों के बीच में जाकर दखलंदाजी करने के लिये भी माना जा सकता है। इस गुरु का प्रभाव राशि के तीसरे भाव पर जाने से जीवन साथी के धर्म और पूर्वजों के प्रति की जाने वाली श्रद्धा और उन पर किये जाने वाले खर्चे के लिये भी अपना असर देगा,जीवन साथी के पुराने रहने के स्थान और पुराने विवादों को भी सुलझाने के लिये माना जा सकता है,छोटी यात्राओं में आने जाने के साधनों को भी प्राप्त करवाने का समय शुरु हुआ माना जायेगा। सन्तान के लिये जो भी लगातार लाभ देने वाले कारण है उनके हमेशा के लिये स्थापित किये जाने वाले निर्माणों के लिये भी यह गुरु अपना अच्छा प्रभाव देता है। लेकिन जो भी प्रभाव मिलता है वह केवल खर्चा करवाने के बाद ही मिलने वाले लाभ के लिये माना जाता है,एक कंजूस आदमी अगर सोचे कि बिना खर्चा किये ही उसे लाभ मिल जाये तो यह गुरु ठंडी हवा के झोंके की तरह अपना असर देता है। गुरु का स्थान इस राशि से दक्षिण पूर्व के स्थानों की तरफ़ जाता है,और इस गुरु के स्वभाव के कारण इस राशि का व्यक्ति लम्बे समय तक दक्षिण पूर्व दिशा में जाकर रहता भी है,इस गुरु के द्वारा पंचम का असर सीधा जातक के तीसरे भाव पर जाता है,और पंचम पर भी जाता है,तीसरा प्रभाव जो मिलता है उससे जातक छोटी यात्रा भी करता है इस यात्रा के अन्दर किसी धार्मिक स्थान जो कि उत्तर-पश्चिम में होता है वहां जाता है,उस स्थान में कर्क राशि के होने से पानी का अपार भंडार भी मिलने की बात मानी जा सकती है,उस स्थान पर जाने के बाद पंचम में असर होने से तथा पंचम पर गुरु की पूरी नजर होने से जातक शनि के प्रति कार्य किया जाता है,वह शनि चाहे काम धन्धे की रूप रेखा बनाता हो या पेट की बीमारियों से अपना असर प्रदान करता हो,पूर्व से चलने वाले प्यार मोहब्बत वाली बाते भी मानी जा सकती है और गुरु शनि के संयुक्त असरकारक प्रभाव से शादी विवाह और शारीरिक रिस्ते बनने वाली बात भी मानी जाती है। जीवन साथी के प्रति जासूसी वाली स्थिति होने से जीवन साथी के द्वारा क्या किया जा रहा है उसके स्वास्थ्य के प्रति और उसके कार्य कलापों के प्रति पूरी असरकारक नजर को भी प्रदान करता है।

गुरु का राशि परिवर्तन (मिथुन)

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