गुरु का राशि परिवर्तन (मेष)

गुरु जो ज्ञान का दाता है,गुरु जो सम्बन्धो का दाता है गुरु जो जीव का कारक है,गुरु जिसके बिना एक पल भी जीवित रहना भारी है उसका आज दिन मे सवा तीन बजे के आसपास कुम्भ राशि से मीन राशि मे पदार्पण हो गया है। कुम्भ राशि का गुरु वैसे भी शनि के घर मे रहकर कमजोर हो गया था,सन्सार मे जिसे देखो वही मित्रता मे अपने अपने भाव बढाने के कोशिश कर रहा था,चूंकि कुम्भ राशि यूरेनस का भी घर कहलाती है इसलिये लोग जिधर देखो उधर ही कमन्यूकेशन और नई नई उक्तियों से अपने मित्रों की संख्या बढाने में लगे थे। गुरु सम्बन्धो का दाता है और जीव की सांस के रूप मे साथ होता है,जिस माहौल में जीव की उत्पत्ति होती है उसी माहौल के अनुसार व्यक्ति की जिन्दगी को ढालने के अन्दर गुरु की अहम भूमिका मानी जाती है.

गुरु का राशि परिवर्तन कुम्भ से मीन मे हुया है इसके द्वारा विभिन्न राशियों के प्रभाव इस प्रकार से है:-
मेष राशि
मेष राशि का गुरु भाग्य और व्यय का मालिक है,यह अपने प्रभाव से जातक के लिये भाग्य और व्यय के रास्ते तय करता है,जन्म कुंडली में गुरु की स्थिति जहां होती है यह आजीवन उसी स्थान के प्रभाव अन्य भावों में गोचर के समय देता है,जैसे किसी व्यक्ति का गुरु कर्क राशि का है तो वह जिस भाव में भी जायेगा तो अपनी उच्चता का प्रभाव ही देता जायेगा,वह अगर सिंह राशि में जाता है तो वह सरकारी फ़लों में खेल कूद के मामले में प्यार मोहब्बत के मामले में जल्दी से धन कमाने के मामले में अपने प्रभाव को उच्चता में ही देगा और अगर गुरु जन्म से ही वक्री है तो जल्दी से फ़ल देने के लिये केवल मार्गी समय में ही अपने प्रभाव को देगा,लेकिन वक्री होते ही वह अपने कुप्रभाव को देना शुरु कर देगा। अगर वही कर्क का गुरु अगर वृश्चिक राशि मे गोचर करता है तो वह अपमान मौत वाले कारण और सम्बन्धियों के मौत के प्रभाव देना शुरु कर देगा,व्यक्ति कितना ही भला है लेकिन उस समय व्यक्ति के अन्दर भी इस प्रकार की भावना भर जायेगी कि कैसे मुफ़्त का धन प्राप्त हो,अगर किसी तरह से गुरु के अंश जन्म समय के सही है तो वह अपने फ़लो में सही परिणाम पैदा कर सकता है और अगर सही नही है तो वह अपने फ़लों को कम ही देता रहेगा,साथ ही वह जो भी फ़ल देगा वह कर्क राशि के ही फ़ल होंगे लेकिन वे फ़ल वृश्चिक राशि के बदल जायेंगे,जैसे कर्क राशि का पानी साफ़ कहा जाता है तो वृश्चिक राशि का पानी शमशान का गंदा पानी कहा जाता है,इस प्रकार से गुरु की सिफ़्त मेष राशि में साधारण रूप से मीन राशि का हो जाने से व्यक्ति के अन्दर अपना मकान बनाने और उसके निर्माण के लिये मानसिक भावना बनने लगेगी,किसी धार्मिक स्थान की यात्रा भी सम्भव है,विदेश जाने वाले भी इस समय का फ़ल प्राप्त कर सकते है,जो लोग कपडे का व्यवसाय करते है उनके लिये नया स्थान बनाने और विदेश मे नया क्षेत्र तलासने में कोताही नही बरतनी चाहिये,जो लोग अपने माता पिता या पूर्वजों के नाम से धर्म स्थानों का निर्माण करना चाहते है उन्हे भी अपने इस महत्वपूर्ण कार्य को कर लेना चाहिये,अक्सर यह भी देखा गया है कि जो लोग स्वार्थी होते है और केवल अपनी ही पूर्ति के चक्कर में लगे रहते है उनके लिये यह गुरु राशि को बदलने के बाद उल्टे फ़ल भे प्रदान करने लगता है जैसे इस समय में अगर मेष राशि का व्यक्ति अपने धन को धर्म परिवार या उच्च कार्यों के अन्दर खर्च करने में कोताही बरतने लगता है तो यह गुर जब मेष राशि में ही प्रवेश करेगा उस समय इसका कार्य नये जीव की उत्पत्ति के लिये भी मानी जाती है इस राशि वालों के लिये यह बजाय जीव की उत्पत्ति के यह जीव को धरती से भी उठाने में कोताही नही बरतता है,इसके साथ जो कुछ मध्यम प्रकार के स्वार्थी होते है उनके लिये यह आगे के साल में जीव की उत्पत्ति तो देगा लेकिन जितना उन्होने अपने समाज परिवार और धर्म के प्रति खर्च करने में कोताही की है उसका एक सौ बीस गुना वह अपने आने वाले जीव के पीछे भी खर्च करने से नही बचेंगे,इस प्रकार से गुरु का मीन राशि में आने के बाद मेष राशि वालों के परिवार को यह गुरु देखता है अगर व्यक्ति की कार्य पीछे के अच्छे रहे है तो वह कुटुम्ब की जगह कुटुम्ब को बढायेगा और धन की जगह धन को बढायेगा। मीन राशि का गुरु अपनी पंचम नजर से इस राशि के चौथे भाव को देखता है उस भाव में अगर जातक के पास रहने के स्थान की कमी है या जातक को स्थान परिवर्तन की जरूरत है तो वह अपने प्रभाव से जातक को स्थान परिवर्तन भी करवायेगा,और अगर स्थान परिवर्तन नही करवाता है तो नये निर्माण का प्रभाव भी दे सकता है। गुरु के इस परिवर्तन के प्रभाव से जातक के लिये वाहन यात्रा और माता के प्रति भी सोचने के लिये समय को माना जाता है,इस राशि के गुरु के द्वारा जातक के पिछले कर्मों के अनुसार गुरु माता मन मकान वाहन पानी और पानी वाले सधन घर के अन्दर रहने वाले सदस्यों तथा जान पहिचान के लोगों साथ में विद्या के क्षेत्र में अपना प्रभाव तभी उचित देने के लिये आगे आयेगा जब जातक के पीछे वाले कर्म सही हुये होंगे। इसके अलावा गुरु की अपनी द्रिष्टि नवी अष्टम स्थान पर पडती है,जातक को जिन कारकों से अपमान जान जोखिम और मौत वाले कारणों से जूझना पडा है उन कारणों का खात्मा भी इसी समय मे यह गुरु करता है,पीछे जो भी बकाया जमा रह गया है उसे अपने कर्मों के अनुसार खर्च करवाकर नये सिरे से जमा धन को बढाने या घटाने का उपक्रम करता है। जो लोग किसी अन्य की गल्ती से अपमानित हो चुके है इस गुरु के द्वारा उस अपमान का बदला जातक के शत्रु को जिसने अपमान किया है को सप्तम में देखकर उसके व्यवहार चाल चलन आदि की पूरी जानकारी लेकर उसके अन्दर की जितनी भी कूट विद्यायें है उन्हे परखकर अगली साल में उन्ही कारकों के द्वारा बदला भी ले लेता है। अगर जातक का धन किसी प्रकार से चालबाजी या फ़रेब से हडप लिया गया है तो यह गुरु अपने प्रभाव से अगले साल तक पूरी जानकारी लेकर न्याय या धर्म की कृपा से उस गये धन को प्राप्त भी कर लेता है,अगर गुरु का ध्यान इस समय में पीछे के किये गलत कार्यों की तरफ़ रहा है और इस समय वह जातक अपने द्वारा किये गये गलत कार्यों के प्रायश्चित के लिये उपाय करता है तो भी गुरु उन्हे अपनी गति प्रदान करता है,और उनके द्वारा की गयी भूलों को माफ़ करने के बाद नयी सृष्टि की रचना देता है।
गुरु का वृष राशि को दिया जाने वाला असर

1 comment:

Sandhya Prakash said...

very good i read this artical and filling better