मेष लगन के लिये धन देने वाले ग्रह

मेष लगन के लिये धन देने वाले ग्रहों में मुख्य ग्रह शुक्र है। शुक्र भौतिक रूप में धन देने का भी कारक है और साझेदार या जीवन साथी के रूप में मानसिक सुझाव रूपी धन भी देने के लिये माना जाता है। बुध इस राशि के लिये मानसिक रूप से अपनी पहिचान देने का कारक है और भौतिक रूप से रोजाना के कार्य और नौकरी आदि के लिये भौतिक धन देने के लिये माना जाता है। चन्द्रमा केवल रहने वाले स्थान पर भावनात्मक रिस्ते देने का कारक है और उम्र की पच्चिस साल तक माता मन मकान और अपने आसपास के माहौल से जुड्कर चलने वाला माना जाता है। सूर्य केवल राजनीति और खेल कूद तथा जल्दी से धन कमाने के लिये बच्चों की शिक्षा और अपनी बुद्धि को प्रकट करने के लिये माना जाता है,मंगल भौतिक रूप से रक्षा सेवा वाले कार्य अपमान जोखिम और रिस्क आदि के काम करवाने वाला है डाक्टर बनकर शरीर की हिफ़ाजत करने वाला इन्जीनियर बनकर सामान और मशीनो को नई जान देने वाला तथा होटल आदि के निर्माण के बाद शरीर के पोषण का कार्य करने वाला है,गुरु भौतिक रूप से भाग्य की कारक वस्तुओं को उपलब्ध करवाने वाला है और मानसिक रूप से ध्यान समाधि यात्रा और धार्मिक संस्थानो वाले कार्य करने के लिये माना जाता है,शनि के द्वारा मेहनत वाले कार्य भौतिक रूप से भी किये जाते है लेकिन मानसिक रूप से लाभ के लिये पहले सोचने का कार्य मेष राशि वालों के लिये शनि के द्वारा होते है। शुक्र मारक होकर भी मारक नही बनता है और मंगल अष्टम का स्वामी होकर भी इस लगन वालों के लिये अपनी नीचता वाली बात नही करता है,केवल बुध ही रोजाना के कामों के अन्दर अपना असर देता है और पुत्री देकर अपमान करवाता है कर्जा लेकर चुकाने के लिये अपनी ऊंची नीची बात करता है।

इस लगन वाले जातकों के लिये शनि गुरु के साथ होने पर निर्माण और बडी कामनाओं का कारक है,लेकिन शनि जब इस लगन में ही विराजमान होता है तो जातक को अपने द्वारा ही नौकरी आदि करने के बाद धन की प्राप्ति होती है। शनि दूसरे भाव में होता है तो जातक को भौतिक सुख के मामले में अन्धेरा और ठंडक देकर ही अपनी युति को पूरा करता है जो भी धन चल पूंजी के रूप में होता है उसे अचल सम्पत्ति के रूप में बदलने के लिये शनि को दूसरे स्थान में माना जाता है। तीसरे स्थान में शनि के होन से जातक को मानसिक रूप से अपने उद्गारों मो प्रकट करने का समय तो मिलता है लेकिन वह समय केवल कार्य को करने के लिये माना जाता है कार्य से फ़ायदा लेने के लिये अन्य लोग अपनी अपनी टांग लगाने लगते है,शनि के चौथे भाव में होने से जातक को आसपास का कार्य करने का माहौल भी बडा कठोर मिलता है और जो भी कार्य किया जाता है उसके अन्दर अधिक मेहनत और कम लाभ का मिलना पाया जाता है। शनि के पंचम स्थान में होने से और भी दिक्कत आजाती है कारण जो भी अपनी खुद की सुरक्षा के कारण होते है वे सभी किसी न किसी कारण से फ़्रीज हो जाते है और प्यार मुहब्बत जीवन साथी लाभ के साधन तथा नगद धन की हमेशा कमी बनी रहती है शनि के छठे भाव में जाने से केवल दूसरों के कार्य करने से ही रोटी और रहने के साधनों का मिलना पाया जाता है,सप्तम में शनि के आने से जीवन साथी या साझेदार का अडियल मिलना पाया जाता है जो भी कार्य खुद के द्वारा किया जाता है उसके अन्दर पहाड जैसा बेलेंस बनाने के बाद मिलना वही होता है जिससे केवल दो जून की मुश्किल से भोजन की व्यवस्था हो पाये। शनि का अष्टम स्थान में होने से जातक के लिये जमीन जायदाद की खरीद फ़रोख्त और कोयले और खनिज जैसे कार्य मिलते है,गुरु अगर कहीं से बल देता है तो अनाप सनाप धन की आवक होने लगती है और मंगल के साथ होने से केवल मशीनों के कलपुर्जों से या अस्पताल में चीरफ़ाड जैसे कार्य ही करने पडते है,नवे भाव में शनि के होने से न्याय या बडी शिक्षा या विदेश से सम्बन्धित काम तो होते है लेकिन परिवार और समाज की मर्यादा को एक तरफ़ रखने से कमाया चाहे कितना ही जाये लेकिन इज्जत का ढांचा खराब हो जाता है,दसवें भाव में शनि होने से जो भी कार्य किया जाता है वह एक बार खराब हो जाता है दूसरी बार सही होता है लेकिन एक कार्य को दो बार करने से जो भी मुनाफ़ा होता है वह कार्य के करने में ही समाप्त हो जाता है और इनकम के नाम पर केवल ठंडी आह के अलावा और कुछ नही मिलता है। ग्यारहवे भाव में शनि के होने से कार्य तो खूब होते है लेकिन इतनी ईमानदारी दिमाग में आजाती है कि काम करने के बाद भी धन का जुडना नही हो पाता है। बारहवे भाव में शनि के होने से केवल भटकाव और खर्चा ही सामने बना रहता है,कभी कभी तो गलत काम करने के बाद या किसी बडी जमानत को देने के बाद जो घर में पहले से रखा होता है वह भी लेजाकर देना पडता है।

शुक्र के लगन में होने से और मंगल के साथ देने से जातक के लिये जीवन साथी और खुद के द्वारा निर्मित सम्पत्ति बडे काम की होती है,जो भी कार्य किया जाता है वह सुन्दर और उत्तम होता है लोग एक के दो देने के लिये तैयार हो जाते है। दूसरे भाव में शुक्र के होने से दोहरी सम्पत्ति की प्राप्ति मिलती है और पुरुष जातक है तो दोहरी पत्नी का योग भी हो जाता है,इसके अलावा तीसरे भाव में शुक्र के होने से जातक के अन्दर इतनी क्षमता आजाती है कि वह अपने को धनी प्रदर्शित करने के लिये अपनी किसी भी पूंजी को बरबाद करने के लिये तैयार हो जाता है और अगर वह स्त्री जातक है तो इतनी तडक भडक से रहना पसंद करती है कि अधिकतर धन गहनो कपडो और साज श्रंगार के सामान पर ही खर्च होता है,चौथे भाव में शुक्र के होने से जातक के अन्दर कामुकता का प्रभाव अधिक हो जाता है या तो वह स्त्रियों की तरफ़ भागना शुरु कर देता है अथवा वह गाडियों और नई नई इमारतों को बनाने उन्हे संवारने के लिए लगा रहता है,पंचम का शुक्र जल्दी से धन कमाने वाले साधनों की तरफ़ ले जाता है और जातक अपने मन के अन्दर हमेशा ही प्रेम प्यार का खेल खेलने के मनोरंजन के लिये अपनी जिन्दगी दाव पर लगाने के लिये तैयार रहता है छठे भाव में शुक्र के होने से जीवन साथी के प्रति हमेशा कोई न कोई पंगा बना रहता है और पंगा नही भी होता है तो जीवन साथी की सेहत मोटापे के कारण अधिक परेशानी देने वाली होती है। सप्तम में शुक्र के होने से जातक अपने जीवन साथी को पैर के नीचे रखना चाहता है और जैसे ही जीवन साथी का दाव लगता है वह अपनी विवाह के बाद की सभी शिकायते एक पल में निकाल कर दूर हो जाता है अष्टम स्थान का शुक्र विदेश जाने के लिये अपनी ताकत देता है जब तक जातक माता के पास रहता है तब तक तो वह अपने जीवन साथी के साथ अपना जीवन बिताता है लेकिन विदेश जाते ही अपनी मर्जी का अधिकारी हो जाता है उसे अपने परिवार की इज्जत शौहरत कुछ भी समझ में नही आती है और अपने परिवार की मर्यादा को दाव पर लगाकर नो दो ग्यारह हो जाता है,नवे भाव में शुक्र के होने से जातक का विवाह होते ही पत्नी या पति धन लक्ष्मी का कारक बन जाते है और जो भी पूर्वजों ने कमाया होता है या अपने जीवन काल में उन्होने मेहनत की होती है उसका हजारों गुना जातक के द्वारा कमाकर अपनी पूर्वजों की इज्जत को बनाकर रखा जाता है। दसवे भाव में शुक्र होने से जातक को एक बार अपनी पूरी गृहस्थी तोडने के लिये मजबूर होना पडता है और दूसरी बार में वह अपने को इतना संयत रखकर अपनी जीवन शैली को अपनाता है कि उसके आसपास के लोग देखकर जलन पैदा करने लगते है। ग्यारहवे भाव का शुक्र जातक के लिये जीवन साथी के लिये बिलकुल बेकार की आफ़त जैसा होता है उसे कितना ही दे दिया जाये लेकिन उसकी भूख ही समाप्त नही होती है,एक से अधिक पुरुष या स्त्री मित्रों के होते घर में क्लेश का कारण बना रहता है,बारहवे भाव का शुक्र जातक की सभी समस्याओं को अपने हाथ में लेकर अपनी जीवन शैली को अपने जीवन साथी के लिये न्योछावर कर देता है।

इसी प्रकार से बुध के लगन में होने से जातक को बातूनी माना जाता है और चन्द्रमा का साथ कहीं से मिल जाता है तो जातक मजाकिया हो जाता है बात बात में मजाक करने के बाद लोगों को हसाने का काम उसके द्वारा होने लगता है,दूसरे भाव में बुध के होने से जातक को केवल बाते करना आता है वह करोड और अरब की बात करेगा लेकिन जेब में अधन्नी नही होगी तीसरे भाव में बुध के होने से जातक अगर किसी प्रकार के कमन्यूकेशन या मीडिया या पबलिकेशन का कार्य कर रहा है तो उसकी पैठ अच्छी मानी जाती है,व्यापारी के गुण भी जातक के अन्दर आजाते है,चौथे भाव में बुध को अगर केतु ने सहायता दी है तो जातक रिहायसी प्लाट आदि खरीद बेच करने के बाद धन को प्राप्त करता है,पंचम में बुध होने से जातक शेयर बाजार या खेल कूद वाले मामलो में जानकार होता है छठे भाव में बुध होने से जातक को मीठा बोलना आता है और वह अपने ह्रदय को सभी के सामने खोल कर रख देता है लोगों के अन्दर उसके प्रति सहानुभूति पैदा होती है साथ ही जुबान के कारण उसके कोई काम रुकते नही है,सप्तम में बुध का भरोसा नही होता है कभी तो वह बहुत ही बेलेंस बनाकर बात करने वाला होता है और कभी अपने ही आदमी को ठगने में उसे कोई दिक्कत नही होती है,अष्टम में बुध के होने से तथा मंगल के घर में होने से जातक को इलेक्ट्रोनिक उपकरण कमन्यूकेशन के साधन रद्दी प्लास्टिक के काम में फ़ायदा होता है नवे भाव का बुध कभी भी कही भी स्लिप होने वाला माना जाता है,कानूनी काम करने की कला होती है और दसवे भाव का बुध राजनीति में ले तो जाता है लेकिन जातक केवल भाषण से ही जनता का काम चलाना जानता है वह बात बनाने में माहिर होता है और किसी भी बात का जबाब बिना देर लगाये देने में समर्थ होता है उदाहरण भी उसकी जुबान पर रखे होते है जिससे कितने ही चतुर आदमी को उससे बात करने का अवसर मिले वह उसे भी अपने उदाहरण से संतुष्ट करने में देर नही लगाता है। इसी प्रकार से ग्यारहवें भाव के बुध के लिये कहा जाता है जातक के जान पहिचान में व्यापारी या कमन्यूकेशन वाले लोग ही होते है और वह अपने अनुसार इतने दोस्तों की संख्या को बढा लेता है कि उसके सभी कार्य दोस्त ही करते  है उसे चिन्ता नही रहती है कि उसके कोई काम रुके भी है। बारहवे भाव का बुध खतरनाक होता है जातक की कब खोपडी को घुमा दे कोई पता नही होता है,अक्सर यह तभी होता है जब राहु कहीं से भी इस बुध को देख रहा होता है।

1 comment:

सुशील बाकलीवाल said...

कृपया वृश्चिक लग्न वालों के लिये भी बतावें ।
उत्तम प्रस्तुति...

हिन्दी ब्लाग जगत में आपका स्वागत है, कामना है कि आप इस क्षेत्र में सर्वोच्च बुलन्दियों तक पहुंचें । आप हिन्दी के दूसरे ब्लाग्स भी देखें और अच्छा लगने पर उन्हें फालो भी करें । आप जितने अधिक ब्लाग्स को फालो करेंगे आपके अपने ब्लाग्स पर भी फालोअर्स की संख्या बढती जा सकेगी । प्राथमिक तौर पर मैं आपको मेरे ब्लाग 'नजरिया' की लिंक नीचे दे रहा हूँ आप इसके आलेख "नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव" का अवलोकन करें और इसे फालो भी करें । आपको निश्चित रुप से अच्छे परिणाम मिलेंगे । शुभकामनाओं सहित...
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