मिथुन राशि और विवाह योग

मिथुन राशि भचक्र की तीसरी राशि है और इस राशि का सबसे बड़ा अधिकार छोटे भाई बहिनो के लिए देखा जाता है बड़े भाई बहिनो के लिए इस राशि का महत्व बहुत ही कम माना जाता है। खुशबू नाम मिथुन राशि से ही आता है और इस राशि के लिए जब भी जीवन साथी के कारण पढ़ाई के कारण देखे जाते है तो सबसे पहले सप्तम को देखना जरूरी होता है. इस भाव की सप्तम की विशेषता होती है की जीवन साथी के मामले मे या तो खानदानी वर का मिलना होता है अथवा किसी प्रकार की असंगति होने पर जीवन साथी के द्वारा आजीवन कोर्ट केश और सामाजिक समझौते के लिए ही सोचना पड़ता है,लेकिन चंद्रमा के बुध के घर मे होने से और चंद्रमा के द्वारा अपने भाव को भावुकता से प्रदर्शित करने के कारण यह भी देखा जाता है की जातक के लिए जो भी काम होगा व्हा माता के द्वारा होगा और पिता की भावुकता पर यह चंद्रमा अपने बल को स्थापित कर लेगा।

हमारे एक जानकार है उन्होने अपनी जिंदगी मे सुख नाम की चीज नही देखी घर मे बड़ा होने के कारण छोटे भाई बहिनो के लिए अपने जीवन को लगा दिया और माता पिता के द्वारा बहुत जल्दी घर की ज़िम्मेदारी कंधो पर डाल देने के कारण शिक्षा भी पूरी नही हो पायी,साथ ही घर मे काम काज अधिक होने के कारण पिता ने माता की सुविधा के लिए शादी भी कर दी॥ पत्नी के आने के बाद खुद को बाहर कमाने के लिए जाना पड़ा और जो काम मिला वह भी एक रेगिस्तानी शहर मे सीमेंट की फैक्टरी मे काम करने को मिला। पानी तक की तकलीफ मे रहकर भी घर वालो की सहायता करने लगे और जब पत्नी ने देखा की यहाँ तो पूरी जिंदगी ही घर वालो की मुसीबतों को झेलना पड़ेगा तो वह अपने माता पिता के घर चली गई और कभी न आने के लिए अपनी राय भी सास स्वसुर को दे गई। बेचारे माता पिता ने शादी तो इसलिए की थी की बड़े घर मे और बड़े काम के अंदर बहू का सुख मिलेगा लेकिन बहू बिना लड़के की राय के घर को छोड़ कर चली गई।

लड़का जब छुट्टी आया तो उसे पता लगा की बहू चली गई है वह अपनी ससुराल गया तो ससुराल वालो ने गालिया देकर घरसे भागा दिया की वह कभी पत्नी को लेने के लिए नही आए वह दूसरी जगह अपनी लड़की का रिस्ता कर देंगे,लेकिन उसके घर पर नही भेजेंगे,श्रीमान जी अपना सा मुह लेकर घर वापस आ गए,उसी समय एक जानकार ने बताया की एक लड़की का पति उसे छोड़ कर चला गया है अगर वह चाहे तो वह उस लड़की की शादी को उसके साथ करवा सकते है,माता पिता तैयार हो गए और दूसरी साल मे उस लड़की से शादी पक्की हो गई। शादी के बाद वह लड़की उन श्रीमान जी के साथ नौकरी करने वाले स्थान पर आ गई और धीरे धीरे तीन लड़किया और एक लड़के की पैदाइस हुयी।

बड़ी लड़की की शादी तो कर दीगई लेकिन उस लड़की का लालन पालन शहर मे हुआ था विवाह गाव मे कर दिया गया तो वह गाव मे रहने के लिए राजी नही हुयी ऊपर से लड़की के ससुराल वाले भी उसे उस तरीके से नही रख पाये जैसे पढ़ी लिखी लड़की को रखा जाता है तीन चार साल रिस्ता चला और चलकरटूट गया। दुबारा से दूसरी जगह पर शादी की गई।

नौकरी का भी समय होता है समय आने पर नौकरी से जाने का वक्त हुआ तो श्रीमान जी ने अपनी दोनोलड़कियों के लिए शादी की बात सोची,जल्दी ही बड़ी लड़की बीच वाली लड़की के लिए तो वर मिला लेकिन शर्त यह हुयी की उसके छोटे भाई की भी शादी भी उसकी छोटी बहिन से कर दी जाये तो बिना किसी लें दें के शादी हो सकती है उसका कारण भी यह था की छोटा लड़का चश्मा लगाता है जिससेउसकी शादी मे दिक्कत आ सकती है। जो भी होना था वह हुआ शादी हुयी और दोनों लड़कियों की एक साथ शादी हुयी,दोनों को अच्छे वर मिले फोटो संलग्न है।

कुंडली मिथुन लगन की है और मिथुन ही राशि है चंद्रमा का त्रिकोणात्मक संबंध शनि से है,शनि तुला राशि का है और शनि का सप्तम संपर्क वक्री गुरु से है,वक्री गुरु का स्थान ग्यारहवे भाव मे है जो बड़ी बहिन के लिए अपनी स्थिति को बताता है। पति भाव का कारक भी गुरु है और गुरु वक्री होने के कारण संबंध का कारक भी जल्दी से विवाह आदि को करवाने वाला और दूर स्थान पर रहने वाला माना जा सकता है। 

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