केतु

लालकिताब में केतु को दरवेश माना गया है। इसका सम्बन्ध इस लोक से कम परलोक से अधिक है। केतु इस भवसागर से मुक्ति का प्रतीक है,केतु दया का सन्देश वाहक है,मंगल बुध और गुरु तीनो ही केतु में सम्मिहित है। केतु यात्राओं का कारक है और जीवन यात्रा के गन्तव्य तक जातक का सहायक है। केतु को तीन कुत्तों के रूप में भी पहिचाना जाता है,बहन के घर भाई ससुराल में जंवाई और मामा के घर भान्जा भी केतु की श्रेणी में आते है। केतु के लिये कुत्ते को पाला जाता है दिन के लिये सफ़ेद कुत्ते को और रात क लिये काले रंग के कुत्ते को पाला जाता है,केतु दिवा बली भी होता है और रात्रि बली भी होता है जबकि अन्य ग्रह या तो दिवा बली होते है या रात्रि बली माने जाते है। यदि कुत्ते का लाल रंग है तो वह बुध के लिये माना जाता है और बुध वाले ही फ़ल देने के लिये अपना असर देता है लेकिन बुध का असर केवल केतु के समय तक ही निश्चित माना जाता है। जब केतु बुरा फ़ल देना शुरु करे तो जातक को किसी प्रकार का अपनी मुशीबतों का शोर नही मचाना चाहिये,कारण जितना अधिक शोर मचाया जायेगा केतु उतना ही अधिक परेशान करने के लिये अपना असर देगा। दसवे भाव के ग्रहों को देखकर केतु की प्रताणन की सूचना निश्चित  रूप से पहले ही मिल जाती है।

केतु की पीडा से जातक का स्वास्थ खराब होता है,तो चन्द्रमा सहायक माना जाता है,कभी कभी केतु पुरुष सन्तान यानी पुत्रो को कष्ट देता है,ऐसा होने पर मन्दिर में कम्बल का दान करना चाहिये,केतु के बुरे प्रभाव से पांव के पंजो एं या पेशाब की नली में रोग पीडा आदि होने के कारण मिलने वाले कष्टो से बचने के लिये पावों के अंगूठो पर रेशमी धागा बांध लेना चाहिये।

केतु का कारक सोने वाला पंलग भी माना जाता है,विवाह के समय जो पलंग मिलता है या बिस्तर मिलता है उस पर केतु का स्वामित्व माना जाता है,प्रसूति के समय स्त्री को इसी पलंग का इस्तेमाल करना चाहिये। ऐसा करने से केतु बच्चे को दुख नही देता है।

जब केतु परेशान करता है तो दूसरे ग्रहों पर भी बुरा प्रभाव डालता है,केतु का राहु या शनि से सम्बन्ध होने पर वह पापी हो जाता है,राहु केतु युति निश्चय ही असम्भव है,किन्तु नकली राहु जो अन्य ग्रहों के मेल से बनता है और वह अगर केतु के साथ युति करते है तो बहुत ही खतरनाक स्थिति बन जाती है। केतु पीडित होने पर भी मारक नही होता है। वह किसी सम्बन्धी की मृत्यु का कारण भी नही बनता है। वह अन्य प्रकार के कष्ट देता है। पापी होने पर केतु प्राय: घर को घर की स्त्रियों को और बच्चों को प्रताणित करता है। जब रवि या गुरु अपने शत्रु ग्रहों द्वेआरा पीडित होते है तो वे केतु क अशुभ फ़ल उत्पन्न करते है,जब केतु अशुभ होता है त वह प्राय: बच्चों को कष्ट देता है। फ़लत: बच्चों को यदि सूखा रोग हो जाता है तो नदी आदि की मिट्टी से नहलाने से केतु का असर ठीक होने लगता है यह प्रयोग तेतालीस दिन तक करना चाहिये।

सामान्य रूप से केतु के उपचार
  1. गणेश चतुर्थी और गणेश पूजा के दिन उपवास रखना चाहिये.
  2. तिल नीबू और केले का दान करना चाहिये.
  3. घर मे काला धोला कुत्ता पालें या ऐसे कुत्ते की सेवा करें,लेकिन शुक्र केतु की युति होने पर हरगिज भी कुत्ता नही पाले और न ही कुत्तों की सेवा करें.
  4. आसपास के लोगों से अच्छा व्यवहार और अच्छा चालचलन बना कर रखें,अन्यथा पेशाब वाली बीमारी होने की बात मिलती है.
  5. नौ साल से कम उम्र की बालिकाओं को खट्टी मीठी टाफ़ियां देने से भी केतु खुश रहता है.
  6. काले धोले तिल बहते पानी में बहाने से भी केतु की पीडा कम होती है.
  7. नाना की सेवा करे और उनकी आज्ञा का पालन करें.
लहसुनिया को भी केतु के लिये पहिना जा सकता है,इसे तांबे के पेंडल में पहिनने के लिये पहले उसे अभिमंत्रित करें उसके बाद उसे केतु के मंत्रों से अभिमन्त्रित पेंडेंड में लगवा कर गले में धारण करें।

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